बिश्नोई टाइम्स डेस्क:
मानवाधिकारों की सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय न्याय और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ दशकों तक ऐतिहासिक संघर्ष करने वाली भारतीय मूल की दक्षिण अफ्रीकी न्यायविद नवी पिल्लई (Navanethem Pillay) को नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने उनके इस योगदान को वैश्विक स्तर पर पीड़ितों की आवाज और कानून के शासन को मजबूत करने वाला करार दिया।
रंगभेद से लेकर संयुक्त राष्ट्र तक का गौरवशाली सफर
दक्षिण अफ्रीका के डरबन में जन्मी नवी पिल्लई के पूर्वज तमिलनाडु (भारत) से गिरमिटिया मजदूर के तौर पर दक्षिण अफ्रीका पहुंचे थे।
ऐतिहासिक शुरुआत: 1967 में नेटाल प्रांत की पहली अश्वेत महिला वकील बनकर उन्होंने रंगभेद शासन के दौरान राजनीतिक कैदियों और नस्लीय भेदभाव के शिकार लोगों के लिए अदालत में कानूनी लड़ाई लड़ी।
अंतरराष्ट्रीय मंच: वे रवांडा नरसंहार के लिए बने इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल (ICTR) की पहली महिला जज व अध्यक्ष रहीं।
संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त: वर्ष 2008 से 2014 तक उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त (UN High Commissioner for Human Rights) के रूप में कार्य करते हुए दुनिया भर में युद्ध अपराधों, मानवाधिकार हनन और अभिव्यक्ति की आजादी के समर्थन में निडर होकर आवाज उठाई।
वैश्विक न्याय और समानता की मिसाल:-
नोबेल समिति ने रेखांकित किया कि नवी पिल्लई ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक कानून में लैंगिक हिंसा और युद्ध अपराधों को औपचारिक रूप से दंडनीय अपराध साबित करने में ऐतिहासिक मिसाल कायम की है। उनका पूरा जीवन वंचितों, शोषितों और पीड़ितों के हक की रक्षा को समर्पित रहा है। इस सम्मान के साथ ही पूरी दुनिया में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और भारतीय समुदाय के बीच गर्व का माहौल है।..|