विशेष संपादकीय | बिश्नोई टाइम्स डेस्क, नई दिल्ली:
7 अक्टूबर 2001 को जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता की कमान संभाली थी, तब से लेकर आज तक भारतीय राजनीति का एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा जा चुका है। 13 साल गुजरात के सीएम और 2014 से लगातार देश के प्रधानमंत्री के तौर पर उनके जनसेवा और नेतृत्व के 25 साल पूरे हो चुके हैं। इस 25 साल के चुनावी सफर में अजेय रहे पीएम मोदी के सम्मान में बीजेपी ने इसे 'सेवा संकल्प अभियान' के रूप में मनाया।
दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में कार्यकर्ताओं और देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने साफ लफ्जों में कहा कि लक्ष्य पूरा होने तक वे न रुकने वाले हैं और न थकने वाले हैं।
पीएम मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें:
1. 'विकसित भारत' का विजन:
पीएम मोदी ने देश के सामने आने वाले समय का रोडमैप रखा। उन्होंने भारत को दुनिया की 'टॉप-3' इकोनॉमी बनाने, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प, ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभारने, ओलंपिक की मेजबानी और अंतरिक्ष में ऐतिहासिक मुकाम हासिल करने का लक्ष्य दोहराया।
2. भगवद गीता का कर्मयोग:
श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक ('कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन') का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे कर्म को ही अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानते हैं। बिना फल की चिंता किए पूरी ऊर्जा और क्षमता से राष्ट्र निर्माण के लिए काम करना ही उनका मार्ग है।
3. असफलता से सीख और राष्ट्र चेतना:
चंद्रयान-2 की शुरुआती असफलता और कोविड महामारी के मुश्किल दौर को याद करते हुए पीएम ने कहा कि चंद्रयान ने गिरकर संभलना और फिर उड़ना सिखाया, जबकि कोरोना काल ने 140 करोड़ देशवासियों की सामूहिक ताकत और अदम्य इच्छाशक्ति का परिचय कराया।
4. जांबाज पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की तारीफ:
विमान को संकट से उबारने और यात्रियों की जान बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस को उन्होंने देश का गौरव बताया। साथ ही विश्वास जताया कि आज भारतीय पायलटों का डंका बज रहा है, कल दुनिया 'मेड इन इंडिया' विमानों की मुरीद होगी।
5. 'मैं आज भी एक छात्र हूं':
वडनगर के अपने स्कूली दिनों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वे क्लास में हमेशा सबसे पहले पहुंचने वाले छात्र हुआ करते थे। सीखने की वही ललक आज भी उनके भीतर जिंदा है और वे खुद को सत्ता का प्रमुख नहीं, बल्कि देश सेवा सीखने वाला एक विद्यार्थी मानते हैं। (Sandeep Bishnoi)