नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के प्रमुख नेता और श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी द्वारा पार्टी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिए जाने के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।
1. आगा रुहुल्लाह मेहदी के मुख्य आरोप और रुख
अनुच्छेद 370 और वादों की विफलता: रुहुल्लाह मेहदी ने पार्टी नेतृत्व (विशेषकर फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस जनता से किए गए वादों—विशेषकर अनुच्छेद 370 की बहाली और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा—पर खरी उतरने में विफल रही है।
पारिवारिक राजनीति पर प्रहार: उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी का नेतृत्व जम्मू-कश्मीर को एक जागीर की तरह समझता है और जनता को केवल चुनाव के समय इस्तेमाल करता है।
इस्तीफे की प्रतीकात्मक तिथि: उन्होंने अपने पिता और वरिष्ठ नेता आगा सैयद मेहदी की पुण्यतिथि (3 नवंबर) को अपने इस कड़े कदम के लिए चुना, जिसे उन्होंने अपने राजनीतिक मूल्यों और सिद्धांतों से जोड़ा है।
2. नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) की प्रतिक्रिया
पार्टी पर कोई असर नहीं: एनसी के वरिष्ठ नेता और मंत्री जावेद राणा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि आगा साहब पार्टी छोड़ते हैं, तो वह अकेले अपने फैसले से अलग हो रहे हैं। इससे पार्टी की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा और पार्टी अपने नेतृत्व के साथ पूरी तरह एकजुट है।
आंतरिक असंतोष से इनकार: पार्टी नेताओं का कहना है कि संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की कोई बड़ी बगावत नहीं है और सरकार अपने विकास एजेंडे पर पूरी मजबूती से काम कर रही है।
3. भविष्य की राजनीतिक हलचल
संभावित उपचुनाव: मेहदी ने संकेत दिए हैं कि वह जनता के बीच जाकर स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में उपचुनाव लड़ सकते हैं या एक नए राजनीतिक विकल्प पर विचार कर सकते हैं।
कश्मीर की राजनीति पर प्रभाव: इस इस्तीफे से कश्मीर घाटी में मुख्यधारा की राजनीति और क्षेत्रीय दलों के भीतर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है, जिससे आने वाले दिनों में नए राजनीतिक समीकरण बनने के आसार हैं।