हर साल त्योहारी सीजन यानी दीवाली और छठ के दौरान ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और कंफर्म टिकट न मिलने के कारण लोग हवाई सफर का रुख करते हैं। इसी मांग का फायदा उठाते हुए एयरलाइंस कंपनियां किराए में भारी उछाल कर देती हैं। कई रूटों पर आम दिनों के मुकाबले किराया तीन से चार गुना तक बढ़ गया है।
क्या एयरलाइंस मनमाना किराया बढ़ा सकती हैं? अक्सर यात्रियों के मन में यह सवाल आता है कि क्या विमान कंपनियों के लिए किराए की कोई अधिकतम सीमा (Maximum Cap) तय है? जानकारी के लिए बता दें कि भारत में साल 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान नागरिक उड्डयन मंत्रालय (MoCA) ने एयर फेयर कैप (न्यूनतम और अधिकतम किराया सीमा) लागू किया था, लेकिन नवंबर 2021 से सरकार ने डोमेन एयर फेयर कैप को पूरी तरह से हटा दिया है।
फिलहाल देश में घरेलू उड़ानों के टिकटों की कीमतें पूरी तरह से डीरेगुलेटेड (डिमार्केटेड) हैं यानी यह पूरी तरह से डिमांड और सप्लाई (Demand and Supply) के नियमों पर काम करती हैं। इसका मतलब यह है कि एयरलाइंस अपनी डायनेमिक प्राइसिंग पॉलिसी (Dynamic Pricing Policy) के तहत किराए तय करती हैं, और वर्तमान में किराए की कोई कानूनी अधिकतम सीमा तय नहीं है।
हालाँकि, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और मंत्रालय समय-समय पर एयरलाइंस को यह सुनिश्चित करने की सलाह देते हैं कि त्योहारों या आपात स्थिति के दौरान किराए में अत्यधिक और अनुचित बढ़ोतरी न की जाए। साथ ही, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एयरलाइंस को अपनी वेबसाइट पर किराए का स्लैब प्रदर्शित करना अनिवार्य होता है।
यात्रियों के लिए सलाह:
अग्रिम बुकिंग (Advance Booking): त्योहारी सीजन में भारी बढ़ोतरी से बचने के लिए महीनों पहले ही टिकट बुक कर लें।
विकल्प चुनें: वैकल्पिक रूटों या कनेक्टिंग उड़ानों का चयन करके महंगे किराए से बचा जा सकता है।